Should We Not Respect Elders?
While every religion instills the value of treating the elderly with love and respect, situations often arise within the family and society that prompt the question: must we continue to respect the elderly even when they act wrongly—whether knowingly or unknowingly? It is often observed in society and within families that if an elder says something that a younger person dislikes, the latter ends up disrespecting the elder. It is not as if an elder can never say anything wrong, but since disrespecting them in a moment of impulse is the easiest course of action, people frequently resort to doing so.
People often ask: just how long can one tolerate this? It is only natural to feel angry when an elder in the family consistently sides with what is wrong. Is it really right to always simply agree with the elders? Should they still command respect when they practice favoritism—depriving other family members of their due rights to benefit just one person? You can find the answer to this serious question only when you begin to understand the difference between respect and agreement.
There is a difference between respect and consent!
अगर कोई कहे कि किसी का सम्मान करने का ये मतलब है की वो जैसा कहे वैसा करो, तो ये बिलकुल सही नहीं है! क्योंकि किसी का सम्मान करना और उसकी बातों से सहमत होना, ये दोनों बिलकुल अलग बातें हैं! सम्मान तो आप एक पागल को भी दे सकते हो जो अनाप शनाप बातें कर रहा है, पर इसका बिल्कुल भी मतलब नहीं कि आप उसकी बातों से सहमत हो! अगर आपके परिवार का कोई बड़ा अपना कोई सुझाव देता है और आपको पसंद नहीं आता तो आप विनम्रता से उसका जवाब दे सकते हैं, उसकी भावनाओं को आहत किये बिना! सम्मान का असली मतलब है ध्यान से उनकी बातों को सुनना और समझना, साथ ही एक इंसान के रूप में उनकी गरिमा का सम्मान करना!

बड़ों के अपमान का अर्थ होता है ऊँची आवाज़ में बात करना, अभद्र भाषा का प्रयोग करना, बड़ों की क़द्र ना करना या फिर उनको बातों से दुःख पहुँचाना! बड़ों की बातों पे सम्मानपूर्वक असहमति ज़ाहिर करना उनका अपमान नहीं है! अगर आपको ऐसा करना आता है तो आप एक Mature इंसान हैं! ये गुण सिर्फ परिवार में ही नहीं, बाहर समाज में भी आपके बेहतरीन चरित्र को दर्शाता है! अगर आपसे कोई बड़ा कुछ ग़लती भी करे तो उसका अपमान करने से सिर्फ नकारात्मकता ही बढ़ेगी, कुछ हासिल नहीं होगा!
अपमान नहीं, समझदारी और सम्मान से बात बनती है!
आप जहाँ भी नौकरी करते हैं, वहाँ हर वो इंसान जो आपसे ज़्यादा तज़ुर्बा रखता है, उसके साथ सम्मान से पेश आते हैं! क्योंकि उन्होंने ज़िंदगी के अच्छे बुरे आपसे ज़्यादा देखे हैं और आपसे ज़्यादा बेहतर समझ रखते हैं! कई बार किसी मुद्दे पे आपको बड़ों का विचार पुराना या फिर गलत लग सकता है, लेकिन ज़्यादातर मुद्दों पर उनके विचारों में चतुराई छिपी मिलेगी! आपका तकनिकी ज्ञान भले ही बेहतर हो पर बड़े लोगों में सब्र, व्यवहार, रिश्ते और बलिदान की समझ और गिरकर वापस सँभालने का तजुर्बा आपसे ज़्यादा है! उनके सम्मान से ही आपको मौका मिलता है जीवन की बारीकियों को सीखने का और बेहतर बनने का!
कोई भी इंसान Perfect नहीं होता, छोटा, बड़ा, बूढा, कोई भी गलती कर सकता है! उम्र ज़्यादा होना ये गारंटी नहीं देता कि आप हमेशा सही ही करोगे गलत नहीं कर सकते! लगभग हर माँ बाप अपने सपनो को भुलाकर अपने बच्चों के अच्छे भविष्य के लिए सबकुछ दांव पर लगा देते हैं, और बाद में वही बच्चे बेरुखी पे उतर जाएँ तो दिल को ठेस तो पहुचेगी न? घर के दादा दादियों ने भी घर को संवारने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और वो भी सम्मान के हकदार हैं! उनका हमारे साथ होना बस भी सबसे बड़ा आशीर्वाद है! बुजुर्गों को प्यार और सम्मान देने से होती है आयु, बल और यश में वृद्धि!
कल्पना कीजिये की आप कोई गलती करते हैं तो आप डांट सुनना पसंद करेंगे या ये अच्छा लगेगा की आपको प्यार से समझाया जाए? ठीक उसी तरह आपके बुजुर्गों की कोई गलत बात से उनके वर्षों के किये हुए Sacrifice को नज़रंदाज़ नहीं किया जा सकता! वो भी प्यार से समझाया जाना Deserve करते हैं! उसकी गलतियों के बावजूद भी किसी को सम्मान देना Emotional Maturity है! कृतघ्यता इंसान का सबसे नेक संस्कार है और बड़ों का सम्मान ही उनके प्रति आपकी कृतघ्यता है जो जीवन भर उन्होंने आपके लिए किया है!

बूढ़े, बुजुर्गों को खुश रखें, इसमें आपका भी फायदा है!
बुढ़ापा इंसान के जीवन का सबसे कठिन समय होता है! आपका स्वास्थय, ताकत, सोचने समझने की क्षमता, अकेले जी लेने की क्षमता आदि कमज़ोर हो जाते हैं! ऐसे में अगर आपके छोटे आपको प्यार और सम्मान नहीं देंगे तो फिर जीने की चाहत भी खत्म होने लगती है! अकेलापन सताने लगता है, दोस्त रिश्तेदार कम हो जाते हैं और लगने लगता है की हम तो अब किसी काम के हैं ही नहीं! ऐसे समय में उनको प्यार और सम्मान की सबसे ज़्यादा ज़रूरत होती है लेकिन दुर्भाग्य से बहुतों को ये सब नहीं मिलता है! बुढ़ापे में उनको महंगे तोहफे नहीं चाहिए, वो बस थोड़ा प्यार-दुलार की उम्मीद रखते हैं! आपका प्यार और दया दिखाने का छोटे से छोटा कदम भी उनको बड़ी ख़ुशी दे देता है!
बुजुर्गों को थोड़ा समय देना शुरू करें!
उनकी बातों को ध्यान से सुनें!,
जहाँ ज़रुरत न हो वहाँ भी उनका सुझाव लें!
उनके साथ त्योहार मनाइए!
उनके कामों में उनकी मदद करें!
बड़ों को सम्मान देने से आपको भी फायदा होगा! पारिवारिक रिश्ते मजबूत बनेंगे और मन को शान्ति मिलेगी! घर का माहोल तो अच्छा रहेगा ही, आपकी खुद की Personality में भी सब्र रखने, ध्यान से सुनने, अच्छा व्यवहार करने जैसे गुणों का विकास होगा! आपके साथ साथ आपका समाज भी अच्छा बनेगा क्योंकि वो समाज जहाँ बुजुर्गों का सम्मान होता है वहाँ पे संस्कारों की जड़ें काफी मजबूत बन जाती हैं! बुज़ुर्गों के द्वारा ही young generation को परंपरा, संस्कार और संस्कृति से जोड़ने का काम किया जाता है! बड़े बुजुर्गों का दिल दुखाकर आप कभी सुखी नहीं रह सकते!
असहमति को अपमान ना बनने दें!
बहुत सारे घरों के बुज़ुर्ग गलत करने लग जाते हैं या पक्षपात करने लगते हैं, ऐसे में आप उनसे बात करके उनको समझाने की कोशिश कर सकते हैं! याद रखें कि उस स्थिति में आप उनसे असहमत हैं आप हैवान नहीं बन सकते जो को basic Respect भी न समझे! अगर आप खुद को एक पढ़ा लिखा और सफल इंसान मानते हैं तो आप बुरे से बुरे परिस्थितियों में भी बुजुर्गों से सम्मान से ही पेश आएंगे!

अगर आप ऐसा नहीं करते तो बस आपको ऐसा लगता है की आप सफल हैं, असलियत में आप अभी भी एक immature इंसान ही हैं! बुढ़ापे में आपके माँ बाप का बचपन लौट जाता है और ऐसे समय में आप उनके साथ वैसा ही व्यवहार करें जैसे वो आपके साथ करते होंगे जब आप छोटे होंगे! बस थोड़ा सा Patience और थोड़ी सी इंसानियत पूरे समाज को खूबसूरत बना सकते हैं!
Future Generations के लिए तो उदाहरण आप ही होंगे!
कहा जाता है कि आपके बाद वाला generation आपके बताए मार्गों पर ही चलता है! ऐसे में आप उनको बुजुर्गों का सम्मान करना सिखाते हैं या अपमान करना ये आप्पे ही निर्भर करता है! वो सिर्फ बातों से नहीं समझेंगे, वो आपको जैसे करते देखेंगे वो आगे जाकर वैसा ही करेंगे ये तो तय है! आज जो सम्मान और प्यार आप अपने बुजुर्गों को दे रहे हैं वही आगे जाकर आप तक वापस लौटेगा जब आप बूढ़े हो जायेंगे! प्रकृति तो अपना balance ऐसे ही बनाती है आप मानो या न मानो!
एक दिन ऐसा आएगा जब हम और आप भी कई generations के लिए बुज़ुर्ग हो जायेंगे, क्या हमें उस वक़्त प्यार और सम्मान की उम्मीद नहीं करनी चाहिए? छोटों के द्वारा सम्मान का हकदार तो एक बुज़ुर्ग तब भी होता है जब वो गलत कर रहा होता है! इंसान के द्वारा की गयी मामूली गलतियाँ उसको नफरत का भागिदार नहीं बनाते हैं! आपका आज किया हुआ नेक कार्य ही आपके आने वाले भविष्य की विरासत है!

